ताज़ा रेजगारी

ये ‘जेएनयू’ तो एक ऐसा शज़र है

#StandWithJNU

अभी माहौल कुछ बिगड़ा इधर है
मगर मुंह खोलना ही पेशतर है

अभी चुप रहने का मंजर नहीं है
सुनो यह बात मेरी मुख़्तसर है

मैं तुमको अहतियातन कह रहा हूं
नहीं आसान आगे का सफ़र है

बताओ चोट कैसे ठीक होगी
वो देता ज़ख्म है, पर चारागर है

नया पन्ना पलटना चाहता हूं
मगर वो फाड़ देंगे मुझको डर है

हैं अब लफ़्ज़ों के मानी मुश्किलों में
समझने का कहां उनमें सबर है

किताबों से डरे सब लोग हैं ये
इल्म की बात इनपर बेअसर है

यहां पर पुलिस का पहरा लगा है
मगर खतरे में मेरा ये शहर है

मेरे आकाश को वो ढंक रहे हैं
मेरी परवाज़ पर उनकी नज़र है

चलाएंगे न जाने देश कैसे
उन्हें आलोचनाओं का डर है

जो आज़ादी के हक़ में बोलता था
गिरफ्तारी की उसकी अब खबर है

वो अपने मन से क्या-क्या सुन रहे हैं ?
जुबां पे उसके बस अम्बेडकर है

तुम इस आवाज़ को हल्के में मत लो
यहां तालीम लेता देशभर है

यहां हर शाख को मिलता है मौका
ये जेएनयू तो एक ऐसा शज़र है

डराओगे जो तुम डर जाएगा ये
तुम्हारी ये गलतफहमी मगर है

असहमतियों को सर आंखो पे रखती
ये जम्हूरियत ताकतवर है

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