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यात्राएँ ख़ुद को जानने का सबसे बेहतर ज़रिया होतीं हैं

Umesh Pant talks to Pratilipi Hindi about Hindi travel writing

“ख़ुद को जानने का सबसे बेहतर ज़रिया यात्राएँ ही होतीं हैं। यात्राएँ आपको यह बताती हैं कि आप एक इंसान के तौर पर कितने संवेदनशील हैं !” – यह मानना है लेखक, पत्रकार और फोटोग्राफर उमेश पंत जी का।

हिन्द युग्म द्वारा प्रकाशित यात्रा वृतांत ‘इनरलाइन पास’ के लेखक उमेश पन्त ने अपने करियर की शुरुआत बालाजी टेलीफिल्म्स में स्क्रीनप्ले राइटर के तौर पर की थी। रेडिओ शो ‘यादों का इडियट बॉक्स विथ नीलेश मिसरा’ के लिए कहानियाँ लिखने से लेकर गाँव कनेक्शन के लिए पत्रकारिता करने तक, उमेश पन्त ने एक दिलचस्प सफ़र तय किया है। उनके ब्लॉग्स ‘गुल्लक’ और ‘यात्राकार’ हिंदी के लोकप्रिय ब्लॉग्स में से एक हैं। इस इंटरव्यू में उमेश जी हमें बता रहें हैं हिंदी में यात्रा वृतांतों की वर्तमान स्थिति से लेकर अपनी यात्राओं के कुछ दिलचस्प किस्से। साथ ही मौजूद हैं डिजिटल स्पेस और युवा लेखन से जुड़े तमाम ज़रूरी सवाल – जवाब जो वर्तमान हिंदी लेखन पर प्रकाश डालते चलते हैं।

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