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आप इतने बैन-खोर क्यों हैं सरकार ?

India's Daughter

प्रिय सरकार,

सुनिये ना। यहां तो कुछ भी कुशल से नहीं है फिर आपकी कुशलता की कामना हम करें भी तो कैसे ? फिर भी आपसे एक बात कहनी थी।

आप ये बात-बात पर जो बैन-बैन खेलनेे लगते हो ना बड़ा अजीब लगता है। और फिर उसके पीछे जो तर्क देने लगते हो उसपर बड़ी हंसी छूटती है। गुस्सा तो खैर आता ही है।

अब निर्भया पर बनी फिल्म इन्डियाज़ डाॅटर को लेकर ये मौजूदा विवाद ही देख लो। आपकी दिक्कत है कि इससे अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर आपकी छवि खराब होगी। आप ना, एक बार उस फिल्म को दुबारा देखिये उसमें उस रेपिस्ट के अलावा और भी कई लोग हैं जो आपकी छवि ही नहीं इस पूरे देश का माहौल भी खराब कर रहे हैं। वो भी कब से। जब वो लोग आपको दिखाई देने लगेंगे ना तो ये फिल्म आपको ज़रुरी लगने लगेगी। बल्कि आप खुद अपना पैसा लगाकर इसी विषय पर इससे अच्छी फिल्में बनाने पर ज़ोर देने लगेंगे। आइना देखना हमारेे व्यक्तित्व के लिये बहुत ज़रुरी होता है सरकार। आपकी छवि दुनिया के सामने तभी तो अच्छी हो पाएगी ना जब वो आइने में भी अच्छी लगती हो ?

कल एक जोशीले चैनल के अति जोशीले एंकर के शो पर मीनाक्षी लेखी से जब एक पैनलिस्ट ने पूछा कि क्या आप इंडिया में बैनिंग को एक कानून बनाएंगी ? तो उन्होंने जो जवाब दिया वो चैंकाने वाला था सरकार। उन्होंने कहा- “आइ विश, आइ कुड बट आई कांट।“ काश कि मैं ऐसा कर पाती पर मैं ऐसा नहीं कर सकती। उनकी इस मजबूरी की वजह थी कि हम एक लोकतांत्रिक देश में रहते हैं जहां आप बैनिंग को कानून नहीं बना सकते। पर अगर उनका वश चलता तो……. ?

उस शो में एक रेपिस्ट की मानसिकता को कैमरे के सामने पेश करने के चलते फिल्म की निर्देशिका लेसली उद्दीन को ऐसे पेश किया जा रहा था जैसे उन्होंने ये फिल्म बनाकर कोई घिनौना काम कर दिया हो। मैं अपनी बताउं तो मैं एक रेपिस्ट से ये उम्मीद कतई नहीं कर रहा था कि वो कहेगा कि उसने गलत काम किया है। उसे ऐसा नहीं करना चाहिये था। उसने वही कहा जो वो सोचता है। उस घिनौने आदमी से आपको और उम्मीद भी क्या थी ? फिल्म में यही तो दिखाया गया था कि एक रेपिस्ट आखिर सोचता क्या है। उसने जो कहा उससे मुझे बिल्कुल झटका नहीं लगा। शाॅक्ड तो मैं उन लोगों की टिप्पणियों से हूं जिनसे आपको कोई दिक्कत नहीं है।

एक बार बैन करने की सोचने से पहले उस फिल्म को तो देखिये जनाब। आप उस रेपिस्ट की टिप्पणी को सुनिये और फिर उन पढ़े-लिखे वकीलों की टिप्पणी से उनकी तुलना कीजिये। क्या वो दोनों एक ही बात नहीं कह रहे ? बस अन्तर इतना है कि वो तिहाड़ के अन्दर बंद कैदी है और वो वकील तिहाड़ के बाहर उसी जैसी सोच रखने वाले आज़ाद अधिवक्ता। देश की एक अच्छी खासी आबादी के नुमाइन्दे हैं वो सर जी।

उस मुकेश ने बड़े चैड़े होकर क्या कहा ? यही ना कि “एक सभ्य लड़की को रात के नौ बजे सड़कों पर नहीं घूमना चाहिये। वो रेप के लिये लड़के से कही ज्यादा जिम्मेदार है। लड़कियों को घर का काम करना चाहिये, बार और डिस्को में घूमकर गलत काम नही करना चाहिये और गलत कपड़े नहीं पहनने चाहिये।“

आप तो खामखा ही नाराज़ हो गये सरकार। आप ने डिफेंस वकील को नहीं सुना ? उसने भी यही तो कहा – “अगर ज़रुरी हो तो ही लड़की को रात के वक्त बाहर जाना चाहिये। वो भी अपने पापा, मम्मी, दादा और दादी के साथ। किसी अजनबी लड़के या ब्वायफ्रेंड के साथ नही।“

उनके जजबे की तो दाद देनी चाहिये – कि “वो अपनी बेटी और बहन को अपने फार्म हाउस में मिट्टी तेल से जला देने की हिम्मत रखते हैं अगर उन्होंने शादी से पहले लड़कों से किसी भी तरह का संबंध रखने की गुस्ताखी की।“ माने कैमरे पर औनर किलिंग की धमकी। आप समझ रहे हैं ना ?

और सरकार आपने दूसरे वकील एम एल शर्मा जी की बात सुनी ? वो महानुभाव तो कह रहे थे कि- “लड़की एक फूल की तरह है। उसे सुरक्षा की ज़रुरत होती है। अगर आप उसे गटर में डालेंगे तो वो बरबाद हो जाएगी। अगर उसे मंदिर में रखेंगे तो उसकी पूजा होगी।“

वो यहीं नहीं रुकते सरकार। वो आगे कहते है “लड़की एक मूल्यवान नगीने की तरह है, एक हीरे की तरह। अगर आप अपना हीरा सड़क पर छोड़ देंगे तो कुत्ते तो उसे खाएंगे ही।“ तो आपको क्या लगता कि कुत्ते की पूंछ आपके बैन करने भर सीधी हो जाएगी ? भौंकने वाले भौंकना छोड़ देंगे। जो कैमरे पर इस तेवर से बात करने को तैयार है उसक और उस जैसों केे तेवर का आप क्या करेंगे सर ?

और आंखिर में तो ये कहते हुए वो हद कर देते हैं सरकार- “भारत की संस्कृति दुनिया की सबसे अच्छी संस्कृति है। उसमें महिलाओं के लिये कोई जगह नहीं है।“

तो सरकार अब आप ज़रा बताइये कि आप किस पर शर्मशार हैं ? उस बलात्कारी पर जिसके चेहरे पर कतई अफसोस नहीं है, जो लड़कियों को उनके साथ होने वाली बदसलूकी की वजह मानता है ? या उन वकीलों पर जो उस बलात्कारी की बात से एकदम इत्तफाक रखते हैं ?

या फिर उस फिल्म मेकर लेस्ली उद्दीन पर जो आपको आपके समाज का आइना दिखा रही है ?

आज जो ये वकील इस फिल्म में कह रहे हैं वो कौन सी नयी बात है आपके लिये ? वो संत-महात्मा, मुल्ला-मौलवी, संतरी-मंतरी, संघी, बजरंगी, इस्लामी जमाती, सब तो कहते रहे हैं अब तक। वो भी खुलेआम। इस फिल्म के बैन हो जाने से क्या दुनिया में भारत की छवि वापस महान देश की हो जाएगी ? क्या उस खोखली छवि को सुधारने की अति उत्साही ललक से ज्यादा ज़रुरी ये कोशिशें करना नहीं होगा कि हमारी छिछली सोच बदलने की मुहिम छेड़ी जाये ? क्या ऐसा करने के लिये ज़रुरी नहीं है कि हमें पता हो कि हममें से कई जि़म्मेदार पदों पर बैठे लोग सोचते क्या हैं। क्या ये फिल्म यही कोशिश नहीं कर रही ? क्या आपको इसे बैन करने की जगह इसे दिखाकर देशभर में ऐसी सोच रखने वाली अच्छी खासी तादात में मौजूद उन लोगों को उनका आइना नहीं दिखाना चाहिये ?

सरकार कहीं आप भी यही तो नहीं मानते ना कि “भारत की संस्कृति दुनिया की सबसे अच्छी संस्कृति है।“ और ये भी कि “उसमें महिलाओं के लिये कोई जगह नहीं है“ ? उम्मीद है कि आपकी धारणा इससे अलग होगी। लेस्ली उद्दीन ने कोई काल्पनिक कहानी नहीं बनाई है कि वो जूझ-मूठ ही हमारे देश की किरकिरी कराने के लिये उसकी पुनीत-पावन छवि पर छीेंटे उछाल रही हैं। सीएचआरआई की रिपोर्ट तो कबका छप चुकी थी ना जिसमें बताया गया था कि इस देश में हर आधे घंटे में एक रेप होता है।

बैन करने की इतनी ही क्रेविंग हो रही है ना तो आप उन वकीलों को बैन करिये जो औरतों और लड़कियों के खिलाफ इस तरह के बयान देते हैं। उन साधु-महात्माओं, मुल्ला-मौलवियोें और संतरी-मंतरियों को बैन कीजिये जिनको ऊल-जुलूल बयान देने की खुजली है। आपने बैन करने में ज़रा देर कर दी है सरकार। बैन करने की इतनी हिम्मत ही है आपमें तो मुकेश जैसों को वक्त से पहले बैन करिये ना ताकि हर आधे घंटे में वो ऐसी कोई वारदात न कर पायें। और इसके लिये वो लड़कियों के कपड़ों, ब्वायफ्र्रेंड्स के साथ रात को बाहर जाने के प्रसंगों वगैरह वगैरह को जिम्मेदार न ठहरा पाएं।

और हां एक बात और। समय बड़ा खराब आ गया है। आप जितना बैन-बैन खेलेंगे सरकार, लोग उतना ज्यादा उत्सुकता से लिखेंगे, पढ़ेंगे, देखेंगे, सुनेंगे। मुकेश जैसों को बैन करने की हिम्मत जिसदिन आपमें आ जाएगी लेसली उद्दीन जैसे लोगों को बैन करने की ज़रुरत फिर आपको पड़ेगी ही नहीं। तो अपनी झूठी इज्जत के खातिर इस वक्त-बेवक्त की बैनखोरी से ज़रा बाज आईये सरकार।

हम इल्तजा ही कर सकते हैं सो कर रहे हैं सरकार। वो क्या कहते हैं -शेष पुनः

आपका

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