ताज़ा रेजगारी

शिप ऑफ थीसियस

पुर्जों से बने शरीर के अंदर ‘कुछ और’ तलाशती एक फिल्म : शिप ऑफ थीसियस

August 14, 2013 // 0 Comments

एक शहर के रुप में मुम्बई की आईरनी यही है कि उसकी बसावट में खुलेपन का अभाव है। पहली बार जब मैं मुम्बई आया था तो मुम्बई को देखकर गहरी निराशा हुई थी। एक शहर इतना बदसूरत कैसे दिख सकता है ? संकरी गलियों में किसी तरह आपस में चिपके हुए उखड़े पलस्तर वाले मकान। फिल्मों में देखे मुम्बई की माया टूट सी गई थी उस वक्त। पर यही कोई तीन साल बाद इस शहर में रहने के लिये आया तो इस शहर को दूसरी तरह से देखना READ MORE