ताज़ा रेजगारी

यात्रा गुल्लक

सोलांग वैली : बर्फ से बाबस्ता वो ढाई घंटे

April 1, 2016 // 0 Comments

ये एक आम ट्रिप होने जा रहा था. हम पहली रात कुल्लू (हिमांचल प्रदेश) में एक होटल बुक कर चुके थे. जिसकी बालकनी से जगमगाता कुल्लू का एक हिस्सा हमारी तरफ झांक रहा था और पेड़ की ओट से मुस्कुराता चाँद कह रहा था – मज़े करो. लकड़ी के बारामदे में बिछी कुर्सियों पर पसरे हमने करीब चौदह घंटे लम्बे सफ़र की थकान मिटाई. दिल्ली से हम पिछली रात के करीब बारह बजे भारत की बांग्लादेश पर ज़बरदस्त जीत के रोमांच के READ MORE

उत्तराखंड बाइक यात्रा -4

December 4, 2014 // 1 Comment

चौथा दिन : बेरीनाग-चौकौड़ी-राईआगर-गंगोलीहाट    सुबह-सुबह हम बेरीनाग से चौकोड़ी के रवाना हो गए. मौसम एकदम खुला हुआ था. आकाश एकदम साफ़ और हवा मंद मंद बह रही थी. बाइक-यात्रा के लिए ये एकदम मुफीद मौसम था. चौकोड़ी पहुंचकर हम काफी देर तक खुद के वजूद को जंगल के हवाले किये बैठे रहे. एकदम शांत माहौल और सामने हिमालय की श्रृंखलाओं का मनोरम दृश्य. बिना कुछ बोले केवल प्रकृति को निहारते हुए ही यहां कई READ MORE

उत्तराखंड बाइक यात्रा – 3

December 3, 2014 // 0 Comments

तीसरा दिन: अल्मोड़ा-धौलछीना-सेराघाट-राईआगर-बेरीनाग सुबह के करीब साड़े नौ बजे हम अल्मोड़ा से रवाना हुए। अब तक बिना नागा भागती बाइक को अब कुछ ईंधन की ज़रुरत आन पड़ी थी। हमने अल्मोड़ा में ही उसकी इस ज़रुरत को पूरा कर लिया। टैंक दूसरी बार फुल कराया जा चुका था। आज का हमारा अगला तय पड़ाव गंगोलीहाट था। हम किसी जल्दबाजी में नहीं थे। अव्वल तो अल्मोड़ा से गंगालीहाट की दूरी तकरीबन 109 किलोमीटर READ MORE

उत्तराखंड बाइक यात्रा – 2

December 2, 2014 // 0 Comments

दूसरा दिन: नौकुचियाताल-गागर-रामगढ़-प्यूरा-अल्मोड़ा पहले दिन के सफर की थकन रात को एक अच्छी नीद में तब्दील हुई तो सुबह-सुबह आंख खुल गई। करीब साढ़े छह बजा था। हम पहले ही तय कर चुके थे कि सूरज के जागते ही हम उससे मिल आयेंगे। बस ज़रुरत भर पानी की छपकियां मुंह में देकर हमने जूते कसे, जैकेट लादे और कैमरा उठाकर चल पड़े। इस ताज़ी सुबह में बाइक पर बैठे पहाड़ी पर चढ़ते उस कच्चे रास्ते पर हम बढ़े READ MORE

उत्तराखंड बाइक यात्रा -1

December 1, 2014 // 0 Comments

पहला दिन: दिल्ली-रामपुर-नौकुचियाताल 21 नवम्बर से 27 नवम्बर हम लगातार हिमालय का पीछा करने वाले थे। 20 तारीख की सुबह ठीक साड़े छह बजे जब हम दिल्ली से रवाना हो रहे थे तो ये बात हमारे ज़हन में कहीं नहीं थी। सुबह अभी एक धुंधलके से जाग रही थी। पैट्रोल टैंक फुल किया चुका था। धीरे धीरे अपने चेहरे से अंधेरे की चादर हटाता सूरज हमें अपने बैगपैक के साथ एवेन्जर बाइक पर दिल्ली की सड़कों से गुजरता हुआ READ MORE

पत्थर नहीं लगवाया तो प्रसाद नहीं दिया

October 1, 2013 // 1 Comment

(यह लेख गाँव कनेक्शन  के ४४ वें अंक में प्रकाशित हो चुका है.) अयोध्या के बारे में अब तक अर्जित मेरी सारी जानकारियों के स्रोत किताबी रहे हैं। स्कूल के पाठ्यक्रम में मौजूद रामायण और रामचरित मानस की किताबों से शुरु हुआ ये सफर अखबारों और समाचार चैनलों से मिली जानकारियों से ज़रिये जारी रहा। रामलीलाओं में भी अक्सर अयोध्या का जि़क्र होता रहा। अलग-अलग शहरों की अलग-अलग रामलीलाओं में न जाने READ MORE

आस्था के लिए जीता एक नगर: त्रयम्बकेश्वर

October 19, 2009 // 2 Comments

इस बार त्रयम्बकेष्वर जाना हुआ। लगा कि भक्ति और आस्था ये ऐसे शब्द हैं जिनका कटटरवाद से कोई लेना देना नहीं है। महाराष्ट में नासिक के पास एक छोटा सा कस्बा है त्रयम्बकेश्वर जिसका अस्तित्व अगर है तो उसके पीछे बस यही भक्ति और आस्था है। लगता कि है कि ये कस्बा इसी आस्था से है और इसके लिए जीता है। आस्था न होती तो ये कस्बा न होता। एक पिछड़ा सा नजर आने वाला इलाका, पिछड़े से नजर आने वाले लोग लेकिन READ MORE

रहस्यों से परदा उठाती गुफा: पाताल भुवनेश्वर

November 25, 2008 // 2 Comments

उत्तराखण्ड की पहाड़ी वादियों  के बीच बसे सीमान्त कस्बे गंगोलीहाट की पाताल भुवनेश्वर गुफा किसी आश्चर्य से कम नही है। यहां पत्थरों से बना एक. एक शिल्प तमाम रहस्यों को खुद में समेटे हुए है। मुख्य द्वार  से संकरी फिसलन भरी 80 सीड़ियां उतरने के बाद एक ऐसी दुनिया नुमाया होती है जहां युगों युगों का इतिहास एक साथ प्रकट हो जाता है। गुफा में बने पम्थरों के ढांचे देश के आध्यात्मिक वैभव की READ MORE

स्वामीनारायण अक्षरधाम अतीत में झांकने की अनूठी कोशिश

November 25, 2008 // 2 Comments

‘अक्षर’ यानी कभी नष्ट न होने वाला। अपने नाम के अनुकुल ही अक्षरधाम के चप्पे-चप्पे पर भारतीय संस्कृति, ज्ञान और कला की ऐसी दुनिया बसी है जो न अब तक नष्ट हुई, न आगे होगी। दिल्ली का स्वामी नारायण मंदिर आज भारत की सबसे आकर्षक विरासतों में शुमार हो चुका है। नवम्बर 2005 में यमुना किनारे स्थित यह नवनिर्मित मंदिर भारतीय स्थापत्य और षिाल्पकला का जीता-जागता सबूत तो यह है ही, पारम्पिरिक षिल्प में READ MORE