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मुम्बई फिल्म फेस्टिवल

आंखिरी लमहों में मुम्बई फिल्म फेस्टिवल

October 31, 2012 // 0 Comments

मुम्बई फिल्म फेस्टिवल  के छटे दिन फेसबुक पर फेस्टिवल के पेज से जानकारी मिली कि मुम्बई डाईमेन्शन कैटेगरी के अन्दर आने वाली 25 शौर्ट फिल्म्स का प्रदर्शन एक बार फिर किया जा रहा है। मुम्बई डाईमेन्शन की पहली स्की्रनिंग छूट जाने का बहुत मलाल हुआ था। इसलिये इस स्क्रीनिंग को किसी भी हाल में न छोड़ने का मन बना लिया था। मैने फेसबुक पर पढ़ा था कि दिन के एक बजकर तीस मिनट पर फिल्म गोदरेज थियेटर READ MORE

मुंबई फिल्म फेस्टिवल : पांचवा दिन

October 29, 2012 // 0 Comments

पिछले पांच दिनों से मुम्बई के पांच अलग अलग थियेटरों का पीछा किया है। हर थियेटर जैसे एक ट्रेन सा हो और फिल्म शुरु होने का वक्त जैसे किसी सफर के शुरु होने का वक्त हो। रोज कई ऐसे ही सफर तय किये हैं इन दिनों में। सुबह उठना, घर से निकलने के पहले ज़रुरी काम निपटाना, रेलवे स्टेशन की तरफ भागना, चलती हुई ट्रेन में मुम्बई फिल्म फेस्टिवल के कैटलौक पर डॉट पेन से टिक करके सम्भावित अच्छी फिल्मों की READ MORE

मुंबई फिल्म फेस्टिवल- चौथा दिन

October 25, 2012 // 0 Comments

एक और दिन मुम्बई फिल्म फेस्टिवल के नाम रहा। शुरुआत खराब थी। इतवार की सुबह सुबह सायान के सिनेमेक्स सिनेमाहौल में औडिटोरियम के बाहर 12 बजकर 45 मिनट पर लगने वाली फिल्म गौडस हौर्सेज़ बिना किसी पूर्व सूचना के कैंसल कर दी गई। स्क्रीनिंग हौल के बाहर दूर दूर से फिल्म देखने आने वाले लोग इन्तज़ार करते रहे पर वहां उन्हें बताने वाला भी कोई नहीं था कि फिल्म किस वजह से ऐसे अचानक टाल दी गई है। 60-62 साल READ MORE

मुम्बई फिल्म फेस्टिवल- दूसरा और तीसरा दिन

October 23, 2012 // 0 Comments

सुबह सुबह नीद खुली तो देर हो चुकी थी। साढ़े नौ बज चुके थे। रात को सोते वक्त सोचा था कि मुम्बर्इ फिल्म फेसिटवल के दूसरे दिन की पहली फिल्म से शुरुआत की जाएगी। और फिर पूरा दिन थियेटर की कुर्सियों पर टिककर फिल्मी अनुभवों को अपनी जि़न्दगी का हिस्सा बनाया जाएगा। पर रात को देर से सोने की आदत सुबह देर से उठने की मजबूरी पैदा कर ही देती है। खैर उठते ही फटाफट नहा धोकर कदम स्टेशन की ओर बढ़ाए जा READ MORE

MAMI DIARY-1 : फिर आया मुंबई फिल्म फेस्टिवल

October 23, 2012 // 0 Comments

एक जलसा मुंबर्इ में दस्तक देने वाला है। इस जलसे की उत्सवधर्मिता का स्वरूप बिल्कुल अलहदा है। इस जलसे में जो होगा, वो स्क्रीन पर होगा और उसका असर लोगों के दिलो-दिमाग और शायद मानसिकताओं पर होगा। सिनेमा को पालते पोसते इस शहर में सिनेमा के इस उत्सव को लेकर कितना उत्साह है, ये कल से पूरे एक हफ्ते देखने को मिलेगा। मामी मुंबर्इ के रास्ते पर है। बस आज यह हम तक पहुंच जाएगा। इस बार मिस नहीं करना READ MORE