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लखनऊ डायरी

वक्त की उंगलियों में नाचती है ज़िंदगी की कठपुतली

August 27, 2014 // 0 Comments

रात का तकरीबन नौ बज रहा था। संगीत नाटक अकादमी से बाहर निकला ही था कि मेनरोड पर एक रिक्शेवाले को अपने रिक्शे पर कपड़ा मारते हुए देखा। पूछा कि क्या वो अम्बेडकर पार्क की तरफ जाएगा? मुझे इसी ओर आना था। रिक्शेवाले ने मना कर दिया। तभी पीछे एक शख्स को साईकिल के खड़ा पाया। वो शख्स अपनी साईकिल रोक के मेरी ओर देख रहा था। मेरे मुड़ने पर तकरीबन 40-45 साल के उस आदमी ने कहा कि ”मैं भी चारबाग की तरफ जा READ MORE

मैगी बनाने में १० मिनट पर सेक्स ‘टू मिनट नूडल्स’ की तरह क्यूं ?

August 24, 2014 // 0 Comments

Lucknow Diary (नोट : डायरी करीब २ साल  पुरानी है पर गुल्लक में पहली बार छप रही है ताकि आगे के लिए सहेजी जा सके) सेक्स सोसाईटी एन्ड शी…. लखनऊ में इस नाम से कोई थियेटर शो है, पहले तो ये जानकर ही जरा आश्चर्य हुआ। साथी गौरव मस्तो स्रीवास्तव निमंत्रण पत्र देके गये थे। लखनऊ में थियेटर देखने का पहला अवसर था ये इसलिये उत्साह भी बहुत था। संगीत नाटक अकादमी पहुंचे तो वहां पहले से भोजपुरी महोत्सव के रंग READ MORE