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गुल्लक टीवी

सूरजकुंड मेले पर एक वीडिओ कोलाज

February 10, 2016 // 0 Comments

मेरे घर की दीवारों पर अब राजस्थान की कुछ कठपुतलियां मुस्कुरा रही हैं. दक्षिण भारत की कुछ लकड़ी की चिड़ियाएं मूक चहचहा रही हैं. कुछ रंग-बिरंगे कागज़ के सिपाही मेरी दीवार से मुझे लिखता हुआ देख जाने क्या सोच रहे हैं. और वो एक जापानी मुस्कराहट मेरी आंखों के सामने अब भी नाच रही है. सूरजकुंड मेले से लौटे दो दिन हो गए हैं पर कुछ है जो भीतर रह गया है. ‘देश की विविधता’ नाम की ये चीज़ जब राजनीतिक READ MORE

The great ‘Kumaoni wedding’

May 24, 2014 // 2 Comments

इस बार अपने गांव चिटगल गया , काफी वक्त हो गया था वहां गए हुए. चिटगल, उत्तराखंड में गंगोलीहाट नाम की एक खूबसूरत सीमान्त तहसील का एक बेहद खूबसूरत गाँव है. पर उस ख़ूबसूरती को संवारने के लिए, उसे महसूस करने के लिए और उसे बचाए रखने के लिए वहां लोग लगातार कम होते जा रहे हैं. असुविधाओं और अभावों के चलते परिवार के परिवार  अपने पुश्तैनी घरों में ताला जड़कर वहां से बाहर आ रहे हैं. रोजगार, शिक्षा, READ MORE

आय हाय रे मिजाता

April 6, 2014 // 1 Comment

उत्तराखंड के लोक-गायक ‘हीरा सिंह राणा’ की गीतों के क्रम में एक और गीत ‘गुल्लक’ के ज़रिये आपको सुनाया जा रहा है.. ‘मिजाता’ नाम के इस गीत में प्रकृति और एक सुन्दर कन्या दोनों की सुन्दरता को बड़ी मासूमियत से दर्शाया गया है. सुनिए और गीत की लिखाई और अदायगी दोनों का लुत्फ़ उठाइये. READ MORE

‘उत्तराखंड आन्दोलन’ का जनगीत ‘लस्का कमर बांधा’

April 2, 2014 // 0 Comments

पिछली पोस्ट में आपने सुना उत्तराखंड के  मशहूर जनकवि और गीतकार हीरा सिंह राणा का गाया  गीत ‘संध्या ‘. आज सुनिए उनका लिखा और गाया गीत ‘लस्का कमर बांधा’. इस वीडियो को मैंने उत्तराखंड के गैरसैण में २४ मार्च को हुए ‘उमेश डोभाल स्मृति व्याख्यान एवं सम्मान समारोह’ के दौरान शूट किया था. आप भी सुनिए इस गीत को जो ‘उत्तराखंड आन्दोलन’ के दौरान प्रचलित हुआ और उसके बाद आज तक  READ MORE

संध्या: हीरा सिंह राणा

March 31, 2014 // 0 Comments

हीरा सिंह राणा उत्तराखंड के मशहूर जनकवि एवं गीतकार हैं. उनके द्वारा लिखे गए गीत उत्तराखंड के तमाम आन्दोलनों  में गाये जाते रहे हैं… उनका लिखा गीत ‘लस्का कमर बांधा’ उत्तराखंड आन्दोलन के दौरान आन्दोलनकारियों के बीच बहुत लोकप्रिय हुआ. यह वीडिओ २३ मार्च २०१४ को गैरसैण में हुए ‘उमेश डोभाल स्मृति व्याख्यान एवं पुरस्कार समारोह’ के दौरान बनाया गया है.. ‘संध्या’ यानी शाम की READ MORE