ताज़ा रेजगारी

समुद्र के लिये

कैसे हो पाते हो
अपनी नमकीनियत में भी इतने मीठे
कैसे रोज तपने के बाद
जल नहीं जाते
बुझ ही नहीं जाते सूरज के साथ

देखता हूं कई मर्तबा
तुम्हें उफनते हुए
तुम कुछ तो सोचते हो
किसी के बारे में

जानता हूं कि एक ज्वार है तुम्हारे भीतर
सुनामी की भीषण सम्भावना लिये
पर समझ नहीं पाया हूं आज तक
कैसे रह पाते हो इतने शान्त
और बांट पाते हो शान्ति को बिना भेदभाव के
मैने भगवान के बारे में कुछ ऐसा ही सुना है
कि वो भी नहीं करता भेदभाव
मैं भगवान को न मानने के बावजूद
तुम्हारे लिये आस्तिक हो सकता हूं।

अपनी तमाम बिखराहटों के बाद भी
फिर फिर लौट आते हो किसके लिये
इन बेचैन लहरों की कोई तो वजह होगी
रोज चला आता हूं कि कुछ तो कहोगे तुम
कुछ बताओगे कभी
खुशी बांटने से बढ़ती है खूब जानते हो तुम
पर लोग तो ये भी तो कहते हैं
कि दुख बांटने कम होता है।

मैने देखा है तुम्हें
शाम घिरते ही बेइन्तहां रुमानी होते
तुमसे इश्क सीखते कितने जवान हुए हैं
कितने कमाल हो तुम
तुम्हें कभी रश्क नहीं हुआ
कौन सिखा सकता है तुमसे बेहतर
कि गहरा होता है प्यार
डूब जाने की हद तक
पर लोग तो अक्सर सतहों में तैरते हैं…….

मैने चांद के सीने में जो दिल देखा है
उससे नदारद है तुम्हारा चेहरा
माफ करना पर सच है ये बात सोलह आने
मैं जानता हूं कि तुम जानते हो
कि सच क्या है
पर कहां से लाते हो वो अनन्त उम्मीद
कहां छोड़ आते हो अपनी सारी नकारात्मकता

धीरे धीरे सीख रहा हूं मैं भी
कि कैसे कोई रहस्य
इतना स्वच्छंद हो सकता है
कैसे हो सकता है कोई दिल
इतना बड़ा और उदात्त

क्षितिज के छोर से
तुम्हारी वो जो लहर आ रही है मेरी ओर
मैं उससे मिलकर आज फिर लौट जाउंगा
पर उससे पहले
बस इतना बता दो मुझे
तुम्हारी धमनियों में खून के जैसे बहता है जो
सच कहो कि वो इत्मिनान है ना…………………..

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