ताज़ा रेजगारी

शहर में लड़की

तमाम टीवी चैनलों पर कई लोग थे
तुम नहीं थी…
हर विषय पर बोल रहे थे लोग
हो रही थी चर्चाएं ज़ोर ज़ोर से।
पर कोई नहीं बोला तुम्हारे बारे में।

मैं जानना चाहता था कहां हो तुम?
देखना चाहता था तुम्हारी एक झलक,
पर कोई कैमरा तुम पर फोकस नहीं हुआ।

पेज थ्री की जगमग
और स्टार की हाईप्रोफाईल कहानियों में
तुम दिखती भी तो कैसे?
तुम्हारी मलिनता
कैमरे पे अच्छी नहीं लगती।
वहां तो चढ़ती है कई परतें
चेहरे के उपर।
मसकारा, आईशैडो, लिपलाईनर
न जाने क्या क्या पोतना पड़ता है चेहरे पर
कैमरे में आने के लिये।

मैने कहा था तुम्हें बदल जाओ
सीख लो यह सब।
पर उफ तुम्हारे वो उसूल…..
तुम्हें सादगी पसंद थी।

तुम आजिज़ आ जाती थी डीजे के शोर से
लहलहाते पेड़ों की सनसनाहट चाहिये थी तुम्हें…
तुम नहीं समझ पाई यहां सब बनावटी है
कि ये एक अलग दुनिया है…

यहां कोई भी वो नहीं है जो दिखता है

तुमने शायद कुछ गलत समझ लिया,

तुम यहां गलती से भटक ही आई…

मुझे डर था कि कहीं तुम्हारा दम न घुटने लगे
शायद वो तुम्हारी ही चीख थी
जिसने मेरे डर को सच कर दिया….

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1 Comment on "शहर में लड़की"

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Guest

बहुत सुन्दर….
गहराई है आपके रचना में..

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