ताज़ा रेजगारी

शब्द

शब्द गिरगिट की तरह होते हैं
और बदल जाते हैं पल में
मायनों की तरह।

रोशनी से मिलते हैं शब्द
और बिखर जाते हैं
जैसे दूधिया चमक में
नहा जाती हैं पानी की बूंद
और पल भर रुककर
बिखर जाती है खुशी सी।

शब्द मिलते हैं अंधेरे से
और सिकुड़ जाते हैं सन्नाटे में
तब शब्दों से बड़ा डर लगता है
तब वो रुलाने लगते हैं।

शब्द जब चढ़ते हैं
किसी शिकारी की बन्दूक में
भेद जाते हैं नसों को ।
ताज़ा खून
फूट पड़ता है फव्वारे सा।
और क्षत विक्षत हिरन के घाव पर
शब्द चिपक जाते हैं मौत से।

शब्द बदल जाते हैं क्रान्ति में
जब कोई मजदूर
जान लेता है कि वह मजदूर है
पर मजदूर होना ही
भाग्य नहीं है उसका।
तब
शब्द किसी जुलूस की शक्ल में
सड़कों में गूंज रहे होते हैं
शब्द बन जाते हैं तब
परिवर्तन की उम्मीद।

Comments

comments

Leave a Reply

2 Comments on "शब्द"

Notify of
avatar
Sort by:   newest | oldest | most voted
SRAADHA
Guest

badhiya …keep it up.

anjule shyam
Guest

अरे शब्दों का पूरा निचोड़ लगा दिया आपने तो…शानदार…

wpDiscuz