ताज़ा रेजगारी

वो दिन तुझसे मिलने का

याद है मुझको वो दिन
तुझसे मिलने का।
सूरज ने उस दिन
ठंडी सी बारिश की थी 
गर्मी की।
बर्फ भी उस दिन
गर्म हवा सी छोड़ रही थी।

और तुम्हारे
गोल गुलाबी छाते के सीकों से 
बारिश की गुलाबी बूंदें 
टपक टपक कर आती थी
मेरे हाथों में।

मुझे याद है
वह छोटी सी बूंद
जिसमें देखा था पहली बार
तेरी परछाई को।
फिर देखा था 
नजर उठा तेरे चेहरे की ओर।

काली अलकें काली पलकों से टकराती
भूरी आंखों के उपर लहराती थी।
और गुलाबी गालों पर
सुर्ख हुए होंठों पे लहराती
वह चांदी सी मुस्कान।

अगर हवा ने उसदिन
नहीं उड़ाया होता वह बरसाती छाता
एक जादुई इन्द्रधनुष मैं देख ना पाता।
जान न पाता 
इतनी सुन्दर होती है बरसात।

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