ताज़ा रेजगारी

ये पैसा नहीं हो तो कितना सही हो

ये हर चीज़ बिकने के बाज़ार ज़ालिम
ये सौदे, ये उनके खरीददार ज़ालिम
बस इक चीज़ पर टिक गई है जो दुनिया
यूं अनजाने में बिकता संसार ज़ालिम

ऐसा नहीं हो तो कितना सही हो
ये कागज़ जो सब कुछ ख़तम कर रहा है
ये पैसा नहीं हो तो कितना सही हो

खुशियों की होती अठन्नी, चवन्नी
भरोसे पे चलती, नहीं पड़ती गिननी
ये बटुए न होते, कटौती न होती
ख्वाहिश की फेहरिश्त छोटी न होती
ये खातों पे चलते घरबार ज़ालिम
ये मर मर के जीना हर बार ज़ालिम

ऐसा नहीं हो तो कितना सही हो
ये कागज़ जो सब कुछ ख़तम कर रहा है
ये पैसा नहीं हो तो कितना सही हो

ये शिफ्टों के पिंजरे में फुर्सत की चिड़ियां
ये रिश्तों के खातिर बची चंद घड़ियां
इधर इश्तेहारों में बचपन का मरना
अकेले घरों में बुढापे का डरना
ये तनहाइयों की दीवार ज़ालिम
ये फिल्मों में सिमटा हुआ प्यार ज़ालिम

ऐसा नहीं हो तो कितना सही हो
ये कागज़ जो सब कुछ ख़तम कर रहा है
ये पैसा नहीं हो तो कितना सही हो

 

 

 

 

 

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