ताज़ा रेजगारी

मुम्बई मेरी जान

उन लमहों में
जब हम मायानगरी को
देख रहे थे छलनी होते।

हम लाचार हिरन थे
जिसे शिकारियों ने घेर लिया था
और फुर्ती से भरा होने पर भी
दुबके रहना एक कोने में
जिसकी नियति बन गई थी।

उन लमहों में हम एक ऐसे लोकतंत्र के साक्षी थे
जो उदार होने के नाम पर
अपनी सुरक्षा ताक पे रख देता है।
जिसे मैत्री सम्बन्ध अपनी जान से प्यारे हैं।

उन लमहों में
हम राजनीति के उस रुप के दर्शक थे
जो महज वोट के लिए कर रही थी पैकजिंग
धमाकों में बिछी लाशों की।
जिनके लिये ये सब थी महज
बड़े शहर की एक छोटी सी बात।

उन लमहों में हमने अपनी इन्टेलीजेन्स को
बगलें झांकते पाया
कि कैसे दहल सकता है
अरबों का लोकतंत्र
दर्जनों बन्दूकों से
बता गये हमें हमारी औकात वो चंद घंटे।

उन लमहों में
जब शहीदों के जख्मों से
बह रहा था ताजा खून
हमें अपनी मौत नजदीक से दीख रही थी
और समझ आ रहा था
मुम्बई मेरी जान का असल मतलब।

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