ताज़ा रेजगारी

बड़ा शायर था वो कुछ शेर लिखकर मर गया होगा

वो कुछ अलफ़ाज़ अपने नाम सबके कर गया होगा
बड़ा शायर था वो कुछ शेर लिखकर मर गया होगा

सभी मसरूफ रहते हैं कि इतना वक्त किसको है
मुझे शक है कोई उसके जनाजे पर गया होगा

किसी की शान में शायद कसीदे पढ़ नहीं पाया
किसी के गाल पर शायद तमाचा कर गया होगा

गरीबों के हुकूकों पर लिखा करता था वो अक्सर
कोई उसकी गरीबी देखकर ही डर गया होगा

न जाने क्यों कलम से उसकी, कुर्सी खौफ खाती थी
उसे वो जूतियों की नोक पर रखकर गया होगा

उसे पढ़कर गिरेबानों को अक्सर झांकते थे वो
कि महरूमों पे जिनके हाथ का खंजर गया होगा

कि उसने खुदखुशी की या किसी ने क़त्ल कर डाला
न जाने किस-किस के सर से पानी ऊपर गया होगा

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