ताज़ा रेजगारी

हमें मालूम इस दुनियां की सब बारीकियां भी थी

भूख की तड़पन भी थी और रोटियां भी थी
पतन की खाईयां भी थी, विजय की चोटियां भी थी।
जिसे था हौसला, चुनने का साहस था, चुनी उसने
घने जंगल में संकरे रासते पगडंडियां भी थी।
इतिहास कहता है यहां कितने उगे और कितने ही डूबे
वक्त के आकाश में दिन रात की पाबंदियां भी थी।
मुझे लगता रहा दुनिया में मैं सबसे अकेला हूं
कि ऐसी ही शिकायत उनके दिल के दरमियां भी थी
कि मैने जब भी भीतर झांक के खुद की तलाशी ली
वहां सन्नाटा भी बिखरा था और सरगर्मियां भी थी।
मेरी चाहत से बाबस्ता तेरी अब बेरुखाई है
वो भी दिन थे कि जब रिश्तों में अपनी नर्मियां भी थी।
हमारे फासले को देखकर लगता नहीं ऐसा
कभी इन फासलों को पाटती नजदीकियां भी थी।
ऐसा नहीं अरसे से अब तक कुछ न बदला हो
गुजरती उम्र थी और साथ में तब्दीलियां भी थी
पता था ये कि जो चाहो हमें मिलता नहीं लेकिन
गलतफहमी थी थोड़ी और कुछ नादानियां भी थी
ये भी नहीं था  कि चोट अन्जाने में खाई हो
हमें मालूम इस दुनियां की सब बारीकियां भी थी

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7 Comments on "हमें मालूम इस दुनियां की सब बारीकियां भी थी"

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Dr.J.P.Tiwari
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बहुत खूब बच्चे! कथ्य और तात्या दोनों ही अच्छे. केवल थोड़े परिमार्जन की आवश्यकता है फिर तो खुली हुई धरा और खुला आसमान है, विचरण और विहार के लिए. स्वागत और शुभकामनाएं

Avtar Meher Baba
Guest

स्वागत है….
lifemazedar.blogspot.com

राकेश कौशिक
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“ये भी नहीं था कि चोट अन्जाने में खाई हो
हमें मालूम इस दुनियां की सब बारीकियां भी थी”

कुछ लोग ऐसे भी होते हैं – बहुत सुंदर – शुभ आशीष

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'/ Dr. Purushottam Meena 'Nirankush'
Guest

लेखन अपने आप में ऐतिहासिक रचनात्मक कायर् है। आशा है कि आप इसे लगातार आगे बढाने को समपिर्त रहें। शानदार पेशकश।

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
सम्पादक-प्रेसपालिका (जयपुर से प्रकाशित हिंदी पाक्षिक)एवं
राष्ट्रीय अध्यक्ष-भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान (बास)
0141-2222225 (सायं 7 सम 8 बजे)
098285-02666

पंख
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ये भी नहीं था कि चोट अन्जाने में खाई हो
हमें मालूम इस दुनियां की सब बारीकियां भी थी

waise to puri rachna ka koi jawab nhi par concluding lines sach me bohot hi umda hai..
likhte rahiye 🙂

सुशील बाकलीवाल
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हिन्दी ब्लाग जगत में आपका स्वागत है, कामना है कि आप इस क्षेत्र में सर्वोच्च बुलन्दियों तक पहुंचें । आप हिन्दी के दूसरे ब्लाग्स भी देखें और अच्छा लगने पर उन्हें फालो भी करें । आप जितने अधिक ब्लाग्स को फालो करेंगे आपके अपने ब्लाग्स पर भी फालोअर्स की संख्या बढती जा सकेगी । प्राथमिक तौर पर मैं आपको मेरे ब्लाग 'नजरिया' की लिंक नीचे दे रहा हूँ आप इसका अवलोकन करें और इसे फालो भी करें । आपको निश्चित रुप से अच्छे परिणाम मिलेंगे । धन्यवाद सहित…
http://najariya.blogspot.com/

संगीता पुरी
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इस सुंदर से चिट्ठे के साथ आपका हिंदी ब्‍लॉग जगत में स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!