ताज़ा रेजगारी

बदलाव भी एक लहर है

बदलाव भी एक लहर है
बूंद बूंद, लमहा लमहा,
तर बतर,
भीगी भीगी,  बहती सी लहर….

और एक सूर्य है तपाता -जलाता सा
मुश्किलों का सूर्य
और राहतों का एक चांद भी तो है…….

दिन ब दिन तय है कि हमें बदलना होगा
वक्त की करवटों के साथ ढ़लना होगा

जिन्दगी ऐसी
जैसे किसी गाड़ी से
जा रहे हों किसी पहाड़ी सड़क पर
हरे पेड़, पीले पत्ते, बंजर खेत, टूटे मकान
फूल, क्यारियां, झरने, नदी
धूप, छांव, सुख और दुख पीछे छोड़ते हुए
किसी नये मोड़ की ओर।

क्या जाने किस मोड़ के बाद
मिलेगी एक मीठी नदी
या फिर कोई खुरदुरा पथरीला पहाड़….

मिल ही जाएंगे कुछ लोग
जिनसे साझा कर पायेंगे
पीछे छूट गये लोगों की याद
तय मानिये उनके पास भी
होगा ही कुछ बताने को।

इस तरह सफर और कारवां
दोनों बढ़ते चले जाएंगे हमारे साथ
बदलते वक्त के समानान्तर….

बदलाव का अर्थ कतई नहीं है
कि हम छोड़ दें पुराने बीते लमहों को
बूढ़े जजबातों को, जर्जर उम्मीदों को
डाल दें यादों के किसी रिसाईकिल बिन में
बेमतलब और बासी समझकर।

क्योंकि अगर हमने ऐसा किया
तो हमें गर्त में धकेलने से पहले
किसी दैत्य की तरह मुस्कुरायेगा समय
और देगा वही घिसा पिटा पर सधा सा तर्क
अपने इस कृत्य के लिये
कि यही होती है
अपनी बुनियाद भुला देने की सज़ा।

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