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फिरकापरस्ती के खिलाफ सहमत जामिया में


इन दिनों जामिया में सफदर हाशमी की याद में एक चित्र प्रदर्शनी लगी हुई है। यह प्रदर्शनी सांस्कृतिक संस्था सहमत के द्वारा आयोजित की गई है। जामिया के एक सोफिस्टिकेटेड फूड कोर्ट यूथ कैफे के पास बने एक नवनिर्मित प्रदर्शनी हाल में एक महीने के लिए लगी यह प्रदर्शनी कई मायनों में देखने लायक है। जब यह हाल बन रहा था तो लगा था कि यहां पर एक और फूड कोर्ट बनेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यह सचमुच बड़ी अच्छा लगा कि हमें बड़े बड़े कलाकारों की तस्वीरें और पेट्रिग्स देखने को मिल रही है। वो भी अपने ही कैम्पस में। सहमत के द्वारा आयोजित इस प्रदर्शिनी मे ंयू ंतो दो तीन बार जाना हुआ लेकिन तब एक अलग ही अहसास हुआ जब जाने माने फोटोग्राफर राम रहमान ने खुद हमें प्रदर्शनी के बारे में विस्तार से बताया। हर एक चित्र पर लगभग एक घंटे तक उनकी व्याख्या चली और लगा कि वास्तव में सभी चित्र इतिहास के कई दस्तावेजों को अपनी ही भाषा में कह रहे हों। सामान्यत चित्रों और तस्वीरों की दुनिया कला कला के लिए के सिद्धान्त के इर्द गिर्द बुनी हुई रहती है। उनकी दुनिया स्वान्तह सुखाय के दायरे के बाहर कम ही निकल पाती है। इसीलिऐ उन्हें देखने समझने के लिए एक अलग नजर की दरकार होती है और इनकी भाषा सभी की समझ के दायरे में नहीं आ पाती। लेकिन यह प्रदर्शनी एक मायने में इन धारणाओं को तोड़ती नजर आती है। यहां जो चित्र और तस्वीरें हैं वो आम आदमी की है और इसीलिए आम आदमी के लिए भी। प्रदर्शनी के शुरुआती सेक्शन में सफदर हाशमी के नुक्कड़ नाटकों की तस्वीरें हैं। इससे पहले भी सफदर हाशमी की जिन्दगी पर बनी एक डौक्यूमेंटी देखने को मिली थी।
उनका जोश, उनकी लगन और आम आदमी की समस्याओं को कहने, सुनाने की उनकी रचनात्मक समझ प्रेरणादायक थी। अपने नुक्कड़ नाटकों के जरिये समाज को जागरुक करने में उनका कोई सानी नहीं था। इन तस्वीरों को देखकर उनका वो नुक्कड़ नाटक याद हो आया जिसके प्रदर्शन के दौरान उन्हें मौत के घाट उतार दिया गया। इसके अलावा दिल्ली में औटो के पीछे नारे लिखवाकर जागरुकता फैलाने के अभियान की तस्वीरें यहां है। मकबूल फिदा हुसैन की पेटिंग्स यहां हैं।
एक तस्वीर में एक आदमी की जैकेट में पीठ पर लिखा हुआ है वा आर वूमन्स ईश्यू। आदमी के पास औरतों की परछाई बनी हुई है और आदमी के नितम्बों वाला हिस्सा खुला हुआ है। राम रहमान इसकी व्याख्या करते हुए असमंजस में नजर आ रहे थे। हांलाकि मुझे भी खुले नितम्बों का कोई खास अर्थ नजर नहीं आया। लेकनि चित्र अच्छा है। इसके अलावा अयोघ्या में सहमत के द्वारा बाबरी मस्जिद को ढहाने के बाद किये गये कार्यक्रम की कुछ तस्वीरें हैं। मकबूल फिदा हुसैन की पेंटिंग्स हैं। इसके अलावा कुछ खास फौर्मेंशन यहां हैं उनमें से एक कश्मीरी कलाकार के द्वारा बनाई गई संरचना है जिसमें एक नाव उल्टी पड़ी हुई रखी है और उसके उपर कई सुन्दर फूल खिलें हैं। राम रहमान ने बताया कि यह संरचना उन कुछ चयनित संरचनाओं में से है जो देशभर के कलाकारों द्वारा भेजी गई संरचनाओं में से प्रदर्शनी के लिए चुनी गई है। इसमें उस कलाकार ने अपनी एक तस्वीर को कई फ्रेम्स में लगाया है जिनमें मिलिटेन्ट, फन्डामेन्टलिस्ट जैसे कई शब्द लिखे हैं। इसके अलावा इस प्रदर्शनी हाल के बाहर सहमत का एक बुक स्टाल भी लगा। जिसमें कुछ अच्छी किताबें हैं। जिनमें मुझे सबसे पसन्द आया जनवादी गीतों का संग्रह सूरत बदलनी चाहिये। इसमें सफदर, फैज़, साहिर लुधियानवी, भुपेन हजारिका और कैफ़ी जैसे रचनाकारों के गीत हैं। इनमें से कई मेरे पसन्दीदा गीत हैं। यह संग्रह महज तीस रुपये में यहां मिल रहा है। इसके अलावा दस बरस सीर्शक से दो भागों में एक कविता संग्रह है। जिसमें इस दौर के सभी प्रमुख कवियों की चुनिन्दा कविताएं हैं। कई सुन्दर पोस्टर भी स्टाल में मौजूद हैं। सब मिलाकर प्रदर्शनी देखने लायक है और जामिया के खूबसूरत इदारे में इसे देखने के लिए आना भी एक खूबसूरत अनुभव ही होगा।

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3 Comments on "फिरकापरस्ती के खिलाफ सहमत जामिया में"

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क्या ये वोई जामिया है जहां से आतंकवादी AK-47 के साथ पकड़े गये थे और जहां का वीसी आतंकवादियों को कानूनी मदद दे रहा है?

अनिल कान्त :
Guest

बहुत अच्छा लगा आपका लेख पढ़कर अनिल कान्त < HREF="http://www.anilkant.blogspot.com/" REL="nofollow">मेरा अपना जहान <>

जामिया मिल्लिया इस्लामिया-अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद्
Guest
wah umesh …….ji …..wah……kya khubsurat wyakhya ki hai cultural terrorism ki …..kitni safgoi se nitamb dikhane wale chitra ko arth samajh main na aane par bhi lajabab bataya ….bahut khub…….waise bhi m.f hussian nam ke us sanskritik aatanki ki art gallery main aur kya pradarshit ho sakti hai………..agar nagnta hi kala hai ,to blue filmo ko oskar to milna hi chahiya?khair jane do….aapki bhi majburi hai ….m c r c main padhna hai to secularta ka dhong rachana hi hoga …. waise hamare mushir sahab bhi apni chhavi ko badalne main lage hain ..ek do mahine main jana jo hai… Read more »
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