ताज़ा रेजगारी

परसों रात की बात

फोटो: उमेश पंत

मैने परसों रात अंधेरे को उलझते हुए देखा
देखा उसे रोशनी से लड़ते हुए
वो मिटा रहा था उजाले के हस्ताक्षर
सुबह बस होने को थी
और अंधेरा मानने को तैयार नहीं था

इतनी उजली नहीं है दुनिया
ये जो खामोश मुगालते हैं
जिन्हें हम ‘सब बढि़या है’ कहकर पालते हैं
वो सब कुपोषण के शिकार हैं
उनके खून में बहता है एनीमिया
आप किस दुनिया में रहते हैं मियां ??

अंधेरा बता रहा था उजाले को
तुम्हारी रोशनी पूर्वाग्रह की शिकार है
तुम्हारा सूरज बिकी हुई सत्ता का आकाशीय अवतार है

वो आदमी जो झोला लेकर जा रहा था फटा हुआ
जिससे गिर रही थी दो चार उम्मीदें
और उस आदमी को खबर भी न थी
कि नहीं टिकती गरीबों के घर उम्मीदें भी
उसने अपने ही पैरों तले न जाने कब कुचल दी थी…
कुचली हुई उम्मीदें पूरी भी तो नहीं होती।

तुम जो दीवाली कहकर चले आते हो
दरअसल बेच रहे हो
उनकी ही उम्मीदों के बारुद से बने पटाखे
और आग तो उनके घर में मुश्किल से जलती है
ये जो अमीरी बढ़ रही देश में किनके घरों में पलती है?

अंधेरा रो रहा था अंधकार के आंसू
पर आंसू भी तभी तो दिखते हैं जब वो चमकदार होते हैं
काले आंसू कभी दिखें हैं भला किसी को

रोते हुए अंधेरे ने पूछा था परसों
तुम गांव के हो या शहर के हो
या बस सुबह और दोपहर के हो
या हो ही नहीं,
गलतफहमियों के देश के काल्पनिक नागरिक तो नहीं हो?

अगर हो तो हर जगह दिखो ना
वो जिसे संविधान कहते हो तुम
हमारे लिये भी लिखो ना

उम्मीदों की संसद में
ये जो नाउम्मीदी के सांसद भर लाये हो
इन्हें किसने चुना है
ये जो प्रतिनिधि होने का चौंगा है
किस खाये पिये बुनकर ने बुना है

उजाला परसों एक आंखिरी बार डरा था
अंधेरे के दिल में जो ज़हर भरा था
उस जहर से रोज मरता है अंधेरा
और उसकी लाश पे रोज पैदा होता है खुशफहमियों का सवेरा

उसके बाद अंधेरे को कभी अपनी बात कहने का मौका नहीं दिया गया
उससे कहा गया गया सो जाओ और एक सपना देखो
जिन्दगी खूबसूरत है, हां हां तुम्हारी भी, भरोसा ना हो तो मान लो
‘मान लेना’ बाजार होती दुनिया की उन दुर्लभ चीजों में है, जो मुफ्त की मिलती हैं
अंधेरे का उलझना अब हो गई है परसों की बात

जिन्दगी खूबसूरत है हां हां तुम्हारी भी, हमारी भी
जिसकी नहीं है, चुप रहे, बोले मत
और अगर बोले तो अंधेरे में बोले
बोलता हुआ दिखाई न दे
वरना खैर नहीं…
अंधेरा दिखाई देता है भला?

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1 Comment on "परसों रात की बात"

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Mukesh Kumar Sinha
Guest

bahut sundar ………