ताज़ा रेजगारी

दूर से आई है खबर कि वो शहर में है….

आज फिर खुला, कोई दरवाज़ा है
आज फिर से पुरानी यादें ताज़ा हैं
आज फिर कोई हलचल है.. कहीं कुछ तो है

खोल के फिर से खिड़कियां शायद भूल गया
हवा के रास्ते कोई तो चला आया है
मेरे कमरे में आज फिर घुली बेचैनी है
जाना पहचाना कोई अजनबी सा साया है…

मुझसे कहता है नज़र फेर के बैठे रहना
याद मत करना, भुला देना, यही बेहतर है
अपने तकिये से रोक लेना, सांस मत लेना
अपने सपनों को सुला देना, यही बेहतर है
और एक टीस भी देता है वो साया मुझको
अपना लगता है कम्बखत वो पराया मुझको

जाने क्या है जो किसी ओर खींचना चाहे
वही खुशबू, वही मौसम, वही अहसास है ये
वही खामोश दिसम्बर है वही ठिठुरन है
वही धड़कन, वही ठहरी हुई सी सांस है ये

आज फिर कोई हलचल है ..कहीं कुछ तो है…
दूर से आई है खबर कि वो शहर में है….

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1 Comment on "दूर से आई है खबर कि वो शहर में है…."

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brijesh pant
Guest

good nice lines……………………