ताज़ा रेजगारी

तुम आई हो

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Photo: Umesh Pant

जब जब  खुशी
गीले कपड़ों की तरह
लटकी हुई होती है
उदासी की तार में
 टपक रही होती हैं
अकेलेपन की बूदें
टप टप टप
सूरज थका हारा सा
बैठा रहता है कहीं दूर
कई कई दिन
 मन कर रहा होता है
एक अदद धूप का इंतज़ार
ऐसे में तुम्हारा आना
उस धूप का आना है
जो दिन-रात आ-जा सकती है बेरोक टोक
तुम वो मौसम हो
जिसके आते ही
भाप हो जाती हैं अकेलेपन की बूदें
आज फिर कई दिनों बाद
गम के मैले कपड़े उतारकर
साफ़ सुथरी खुशी
पहन ली है मन ने
उदासी की तार
आज फिर खाली लटकी हुई है
तुम आई हो….

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