ताज़ा रेजगारी

तनहा कोने खाली से

टूटे टूटे बिखरे बिखरे तनहा कोने खाली से
देखो कैसे डरे हुए हैं लमहों की बिकवाली से

बिक जाती हैं बंटने वाली चीजें भी बाजारों में
तभी तो धन्ना सेठ बने हैं जो थे लोग सवाली से।

हमको खबर जो बेच रहा है भूख से होती मौतों की
वही है जिसने रोटी छीनी मरे हुए की थाली से।

यह बाजार का गणित है भैया हंसना रोना क्या जाने
प्यार के मीठे बोल यहां पर लगते गाली गाली से।

कुरियर से घर में गुलदस्ता भिजवाने का फैशन है
कौन तोड़कर लाता है अब फूल खेत की डाली से।

मौल के बाहर सड़क किनारे दिये बेचने वाले ने
फांसी पर खुद को लटकाया पहली रोज दिवाली से

परदे के आगे जिसके जलवे पे दुनिया मरती है
परदे के पीछे मरती हैं एक रोज बदहाली से

चकाचौंध की दुनिया में उनको कोई उम्मीद नहीं
हिन्दी बोलने वाली और सलवार पहनने वाली से

जबसे देश में बाहर का बाजार सिमटकर आया है
तबसे देश को नफरत है लाचारी और कंगाली से

हाथौं में पैसा दिमाग में पावर जिनके हावी है
कितनांे को मरवा देते हैं महज हाथ की ताली से।

इन्टरनेट पर लव यू कहके प्यार जताने वाले लोग
अब तो असल में लगने लगे हैं एकदम जाली जाली से।

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1 Comment on "तनहा कोने खाली से"

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rohit 'vats'
Guest

badhiya post….anth ki taraf thoda sa rujhaan saaf hua hai….