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गिर्दा की याद में

दिल लगाने में वक्त लगता है, डूब जाने में वक्त लगता है,वक्त जाने में कुछ नही लगता, वक्त आने में वक्त लगता है- गिरीश तिवारी

दोस्‍तो,
पिछले दिनों हमारे प्रिय जन कवि गिर्दा नहीं रहे। गिरीश तिवाड़ी ‘गिर्दा’ के जाने से जो जगह सांस्‍कृतिक-राजनीतिक जगत में खाली हुई है, उसे भरना अब मुमकिन नहीं। हम में से सभी के पास गिर्दा की अलग-अलग यादें और संस्‍मरण हैं। इनके बारे में बात करना ही गिर्दा को असली श्रद्धांजलि होगी।

इसीलिए हम जन संस्कृति मंच की तरफ से गिर्दा को याद करते हुए एक बैठक बुला रहे हैं। गिर्दा की याद में होने वाली इस बैठक में उत्‍तराखंड से गिर्दा के कुछ पुराने साथी भी आएंगे। दिल्‍ली के उनके कुछ पुराने मित्र भी होंगे और वे युवा भी, जिन्‍होंने आखिरी क्षणों में गिर्दा को सुनने का सुख प्राप्‍त किया है। जगह है सेमीनार हॉल, दूसरा तल, राजेंद्र भवन, दीनदयाल उपाध्‍याय मार्ग, दिल्‍लीऔर दिन है
4 सितंबर, शनिवार शाम 5 बजे
कुछ महत्‍वपूर्ण वक्‍ताओं में प्रो. शेखर पाठक, चंडी प्रसाद भट्ट, मंगलेश डबराल, पंकज बिष्‍ट, आनंद स्वरुप वर्मा आदि होंगे। इसके अलावा उनकी कुछ कविताओं का पाठ और कुछ गीतों की प्रस्तुति भी होगी। उत्तराखंड की लोक कला पर बनी एक लघु फिल्‍म का भी प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमे गिर्दा सूत्रधार की भूमिका में हैं। साथ ही गिर्दा के अवसान के बाद उन पर निर्मित एक ऑडियो-विजुअल कोलाज की भी प्रस्तुति होगी।

हमें उम्‍मीद है कि आप इस कार्यक्रम में जरूर आएंगे।

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