ताज़ा रेजगारी

ख़बर दर ख़बर

टीवी पर आने वाली हर नई ख़बर के साथ
हमारी आत्माएं और भ्रष्ट होती जाएंगी।

नीदों की आंखों में धूल झोंकता शहर
रोशनी बनकर हमारे अंधेरों में शामिल हो जाएगा।

ग्ंधाते पसीनों की भीड़ में
हमसे छीन लिये जाएंगे हमारे मोबाईल फोन।

सरेबाज़ार सड़कों के बीच से
उठा ली जाएंगी हमारी खुशियां दिन दहाड़े।

हमारी शिकायतों पर टलती रहेंगी कार्रवाईयां।

हमारे इलाज के पैसे लूटकर
बनाये जाते रहेंगे हाथी वाले पार्क।

हमें बेची जाएगी ब्रांडेड हंसी
और हमें फैशन के तौर पर खरीदकर मुस्कुराना होगा।

हमें अपने ताज महल पे करवाया जाएगा फक्र
और हमारे सर से जाती रहेंगी छतें।

हमारी किराने की दुकानें तोड़कर बनेंगे मौल
और वहां जाने के लिये
हमें अपनी नौकरियों के हाथों बिक जाना होगा।

पैट्रोल के दाम बन रहे होंगे अस्थमा का कारण
और हमारे आक्सीजन मास्क में सीएनजी घुली हुई होगी।

महंगी कारों में लौक हो जाएंगी हमारी आखिरी सांसें
और खून में रहने लगेगा एक लम्बा ट्रैफिक  जाम।

हम खुश होते रहेंगे अपनी फेसबुक प्रोफाईल के लाईक्स पे
तब भी जबकि असल में हो रही होगी हमारी जिन्दगी लौगआउट….

Comments

comments

Leave a Reply

1 Comment on "ख़बर दर ख़बर"

Notify of
avatar
Sort by:   newest | oldest | most voted
अवधेश कुमार मौर्या
Guest

Nice effort. Sir itna time kam hota hai ki log do shabdo se jayada comment de nahi pate hao…

thanks..