ताज़ा रेजगारी

कोशिश

ऐसी क्या मजबूरी थी इतना न हुआ कल आ जाते
कल से फिर ना आओगे बस इतना ही बतला जाते।

हमने समय को ऐसे तांका जैसे तुम्हारी आंखें हों
पलों को पलकें मान रहे थे इस भ्रम को झुठला जाते।

तुमको ही तुम माना होता ऐसा होता बेहतर था
हमको तोे तुम सा हि दिखा जिसको देखा आते जाते।

सोये तो तुम आंखों में थी जगते भी कुछ ना बदला
परिवर्तन है नियम प्रकृति का खुद को कैसे समझाते।

सुनो कि मैं जो कुछ कहता हूं कहो कि तुमने कुछ न सुना
सुनना कहना बेमतलब है रोते गाते चिल्लाते।

मैने कहा तो बेमतलब था उसने कहा तो प्यार हुआ
प्यार के मानी कैसे अलग है काश कि तुम समझा पाते।

ये भी के तुम अब कभी न आना ये भी के बस अब आ जाओ
घड़ी घड़ी गिरगिट के जैसे मन ये बदलता हैं बातें।

खैर कि ये वाजिब न सही ऐसा भी नही कि फिजूल ही हो
हर कोशिश कोशिश होती है हमने की बस इस नाते।

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