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काश प्यार एक बच्चा होता।

काश प्यार एक बच्चा होता। छोटी छोटी बातों से नावाकिफ होता
नादानी में कभी कभी
कह जाता बातें बड़ी बड़ी।
और पास में होती मां
सुनती हंस देती खड़ी खड़ी।
कितना अच्छा होता।
काश प्यार एक बच्चा होता। उसे न पैसे से कोई मतलब होता
सौ पचास के हरे नोट वह नहीं जानता
पैसा उसके लिये होता एक चौकलेट
जो लाते पापा रोज शाम।
कुछ भी कह जाता जो मन में होता
इतना सच्चा होता।
काश प्यार एक बच्चा होता। अपनी साईकिल के पहियों में
घूम घूम कर जितनी दिखती आस पास
बस उतनी ही दुनिया होती।
हरी घास पर साईकिल से गिर जाने पर
कोमल पैरों पर जितनी लगती
चोट महज उतनी होती।
मुंह से कुछ भी कह जाता
पर दिल का अच्छा होता।
काश प्यार एक बच्चा होता।

बड़े प्यार से हाथ फेर लेता कोई सर पर
तो अपना हो जाता
उंगली थामे पापा
बस वही खिलौना दिलवा देते 
और इतने में ही
पूरा सपना हो जाता।
रिश्ता गर इक बार जो दिल से
मजबूती से जुड़ जाता
फिर कभी न कच्चा होता।
काश प्यार एक बच्चा होता।
जो दिखता बस वो ही होता
नही जानता
चिकनी चुपड़ी बातों से छलना।
कभी किसी का गलत फायदा नहीं उठाता
आता नहीं उसे
गहरी चालें चलना।
हंसता वो मासूम हंसी
ना होता कड़वा
खटटा सा मीठा सा
अंगूर का गुच्छा होता।
काश प्यार एक बच्चा होता।

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2 Comments on "काश प्यार एक बच्चा होता।"

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Hashmi
Guest

very nice

nidhishukla
Guest

Behad seedhi saral bhasha mein, badi geheri baat keh di aapne, Nice one Umesh!