ताज़ा रेजगारी

एक गिलहरी धूप के हाथ से बिस्किट छीन के भागी थी

उस दीवार पे खिड़की थी और खिड़की पर एक गोरैया
बहुत दिनों से ढूंढ रहा हूं, वो तस्वीर मिलेगी क्या ?

एक गिलहरी धूप के हाथ से बिस्किट छीन के भागी थी
लौट के बरसों से ना आई, फिर से धूप खिलेगी क्या ?

एक कटोरी खुशी रखी थी कबूतरों के चुगने को
वक्त के पांव से छलक गई है, फिर से खुशी भरेगी क्या ?

मां के हाथ में सलाइयों की चोचें अक्सर लड़ती थी
यहां शहर में ठंड नहीं है, मां बनियान बिनेगी क्या ?

ईद से पहले शबनम अप्पी सलवारें सी देती थी
अब उनको कुछ कम दिखता है, वो सलवार सिलेगी क्या ?

मैंने रात को नीद की बस से सपनों के घर जाना है
एक टिकिट फालतू बचा है , तू भी साथ चलेगी क्या ?

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