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इसे कहते हैं जीवटता


उसकी उम्र 76 वर्ष से ज्यादा हो गई है। चेहरे पर उगी बेतरतीब दाड़ी के बीच बुढ़ापे की कमजारी को साफ देखा जा सकता है। लेकिन उसके अन्दर ऐसा क्या है जो उसे इस तरह के कदम उठाने पर मजबूर कर रहा है। ऐसी कौन सी पीड़ा है कि वो सख्स इन दिनों दिल्ली में बिड़ला मन्दिर के पास हिन्दु महासभा भवन परिसर में धरने पर बैठा हुआ है। आज दसवां दिन है। जीडी अग्रवाल नाम के यह वयोवृद्ध व्यक्ति गंगा को बचाये जाने की मांग पर आमरण अनशन कर रहे हैं। अग्रवाल आआईटी कानपुर में प्रोफेसर रह चुके हैं। उन्हें देश के चुनिन्दा पर्यावरण वैज्ञानिकों में शुमार किया जाता है। लेकिन उम्र के इस पड़ाव पर जब वो गंगा को प्रदूशित होने से बचाने की मांग पर अड़े हैं उन्हें गम्भीरता से लेने की सुध सरकार को नही है। उत्तरांचल पत्रिका के लिए उनका साक्षात्कार लेने जाना हुआ तो उनसे मुलाकात हुई। हांलाकि जब हम पहुंचे तो वो बातचीत करने की हालत में नहीं थे। उन्होंने बताया कि सुबह से कई सारे लोग उनसे मिलने आ चुके हैं ऐसे में थकावट इतनी है कि अभी बात करना सम्भव नहीं हो पाएगा। उसी समय मैग्सेसे अवार्डी राजेन्द्र जी भी वहां मौजूद थे। जो कई दिनों से अग्रवाल जी के साथ वहां डटे हैं। अनशन स्थल पर मीडिया कोर्डिनेशन का सारा काम संभाल रहे पवित्र सिंह ने बताया कि अब तक कोई सरकारी अधिकारी या मंत्री उनसे मुलाकात करने नहीं पहुंचा है।
दरअसल अग्रवाल जी की मांग गंगा के अविरल प्रवाह को लेकर है। उनका मानना है कि गंगा पर बन रहे बांधों की वजह से उसका प्रवाह बाधित हो रहा है। उनका कहना है कि गंगोत्री में जिस तरह से 90 मेगावाट की मनेरी भाली प्रथम चरण परियोजना के लिए गंगा का जिस 14 किमी लंबी सुरंग में कैद किया गया है उस परियोजना के गेट खोलकर गंगा को मुक्त किया जाये, 600 मेगावाट की लोहारीनाग पाला व 480 मेगावाट की पाला मनेरी जलविद्युत परियोजनाओं का निर्माण रदद किया जाय। इन मांगों को लेकर उन्होंने 13 जून को उत्तरकाशी के मणिकर्णिका घाट पर आमरण अनशन किया था। दस दिने चले इस अनशन के प्रभावस्वरुप खंडूरी सरकार ने पाला मनेरी और भैरो घाटी नाम की दो जलविद्युत परियोजनाओं को स्थगित भी कर दिया। हांलाकि इस मामले को राजनैतिक तूल भी दिया गया। कांगेस ने इसका घोर विरोध किया कि इससे कई लोगों का रोजगार छिन गया है। लेकिन अग्रवाल का मानना है कि बांधों के चलते जिस तरह से टिहरी को जलमग्न होना पड़ा था वो ऐसा कोई मंजर आगे नहीं चाहते। वो इन बांधों को ग्लोबल वार्मिंग की दृश्टि से भी हानिकारक मानते हैं। उनका मानना है कि उत्तराखंड में बिजली उत्पादन के कई अन्य विकल्प तलाशे जा सकते हैं इसके लिए गंगा जैसी धरोहर की बलि चढ़ाना कतई जायज नहीं है। हांलाकि अग्रवाल द्वारा उत्तरकाशी में किये गये अनशन के बाद केन्द्र सरकार ने ण्क उच्च स्तरीय विशेषज्ञ दल का गठन किया। लेकिन आगे कोई सन्तोष जनक कार्यवाही ना होने से खफा अग्रवाल अब दिल्ली आकर अनशन पर बैठे हैं। दस दिनों से अनशन पर बैठे ये बुजुर्ग दिनोंदिन कमजोर होते जा रहे हैं। लेकिन ना जाने यह लोकतांत्रिक कही जाने वाली सरकार का कौन सा चरित्र है कि अब तक किसी सरकारी अधिकारी या मंत्री को उनकी सुध लेने की नहीं सूझी है। देखना होगा कि आंखि यह असंवेदनशीलता कब तक बर्करार रहती है। गंगा को बचाने की मांग को लेकर अपने प्राण त्यागने तक संघर्ष करने की प्रतिझा ले चुके अग्रवाल जी को समर्थन देना उस सोच को समर्थन देना होगा जो खुद को अपने देश की भलाई के लिए जीजान से न्यौछावर करनेे का जीवट रखती है। जो मैं और मेरा परिवार के दायरे से कहीं उपर है।

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5 Comments on "इसे कहते हैं जीवटता"

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jayram
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soch ka dayra to wakai bada hai .main bhi gaya tha un pawtra aatma se milne , par aisa balidan kis kaam ka jisse lakshya pura na ho …………………..aaj ke daur main ye aamran anshan ki baat bemani hai…..mera irada sri g.d agarwal ji ke upar sandeh ka nahi balki unke wirodh ke tarike par hai. aaj gandhigiri ka ye formula filmo main hi hit ho sakta hai …… wirodh ka tarika aisa ho ki wo logon tak pahunche ..bajaru media ke is yug main aanran anshan ko coverege milna wo bhi ganga bachane ke mudde par asambhaw hai…………… abhi… Read more »
विष्णु बैरागी
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यह खबर पहले भी कहीं पढ चुका हूं। उससे भी पहले खबर पढी थ जिसमें अग्रवालजी को विवादास्‍पद बताया गया था। लगता है,अग्रवालजी का धरनास्‍थल सार्वजनिक नहीं है और शायद इसीलिए उनका नोटिस नहीं लिया जा रहा है।ईश्‍वर से उनके बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य की और सफलता की कामना।

विष्णु बैरागी
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आपसे कुछ निजी बात करना चाहता हूं। आपका ई-मेल पता ज्ञात नहीं कर पाया। मुमकिन हो मुझसे bairagivishnu@gmail.com पर सम्‍पर्क करें।

Udan Tashtari
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पर्यावरण संरक्षण, सुदृढ़ भविष्य, महत्वाकांक्षी विकासशील योजनायें एवं वैश्विक प्रतियोगी बाजार-सबमें एक संतुलन की आवश्यक्ता है. अति किसी की भी ले डूबेगी.अग्रवाल जी की जीवटता को सलाम.

KANISHKA KASHYAP
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There are two things, i would love to mention here!1/ There was a man, intutive, inventive and ingenuous.. he was clever enough in his gaunere. he belonged to a far off remote area, completel untouched from urban life style.once there clicked a idea to him… it was about desingning a vehicle somewhat similar to bicycle.. . he worked day in day out , before he succeeded designing one such rural model. where a rope was working as chain and bamboo sticks as spikes etc.someone suggested him to visit nearbycity and show his invention to urban people. he managed to carry… Read more »