ताज़ा रेजगारी

आधी रही मुराद

आंखों के किसी बेहतरीन खाब सा था
वो जो लमहा था लाजवाब सा था

जबसे देखा उसी में डूब गये
उसका चेहरा किसी सुर्खाब सा था

कैसे ना झुकते शान में उसकी
उसका रुतबा जो था नवाब सा था

उसने यूं तो कभी कुछ भी न कहा
वो न कहना भी आदाब सा था

उनको लेकर हमारा इश्क जो था
किसी आधी रही मुराद सा था।

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