ताज़ा रेजगारी

आख़िरी कश

smoke-on-the-face-of-humanity
पलकों से लिया मैने
तुम्हारे चेहरे का
आख़िरी कश
आंखों की ऐश ट्रे में
अधबुझे से ख्वाब रह गये हैं बस।
तुम ऐसी तलब हो
जो कभी राख नहीं होती।
अब सब कुछ धुंआ-धुंआ है
तुम्हारे सिवा।

Comments

comments

Leave a Reply

2 Comments on "आख़िरी कश"

Notify of
avatar
Sort by:   newest | oldest | most voted
Ankita chauhan
Guest

Real … The Eyes on Fire ..!! 🙂

shrimant arun
Guest

एक बेहतरीन प्रयोगवादी कविता

wpDiscuz