ताज़ा रेजगारी

अपनी अलमारी में देखो मेरी नीद पड़ी होगी

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नीले आसमान पर फिर से काले बादल छाए हैं
किसी बात पर धूप की सूरत सुबह-सुबह उखड़ी होगी

सूरज भी कल खफ़ा खफ़ा था तू कल रात उदास थी क्या ?
या फिर तारों की टोली अंधेरे से झगड़े होगी

बिना बताये एक दिन यूं ही मुझे छोड़ कर चली गई
तेरे दरवाज़े के बाहर एक उम्मीद खड़ी होगी

उस दिन मैंने ख्वाबों के संग तहें लगाकर रख्खी थी
अपनी अलमारी में देखो मेरी नीद पड़ी होगी

 

 

 

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