ताज़ा रेजगारी

अकेलापन

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जैसे फुर्सत से की बिनाई का
कोई धागा उधड़ गया हो,
छूट गये हों फंदे।वक्त के खालीपन में,
गुम गई हो सीकें ।पूरा होते होते
अधूरा रह गया हो
किसी के लिये रतजगे रखकर,
प्यार के ऊन से बिना
रिश्तों का स्वेटर ।

जैसे बिना हुआ सबकुछ
हो गया हो बेमायने।

रह गया हो धागाभर अकेलापन

ऊन का एक गोला लुड़कता जा रहा हो
किसी स्याह अनन्त अंधेरे की तरफ,
छोड़ता जा रहा हो उलझते धागे,
और कोई भी न हो
जो उसे थामे और समेट ले
कोई भी नही

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